एकाग्र वृत्ति:- जब वृत्ति ध्येय ( लक्ष्य) पर पूर्णता एकाग्र होती है तो उस समय समय स्वयं का ज्ञान नहीं रहता मैं ध्यान लगा रहा हूं कहां बैठा हूं क्या कर रहा हूं कुछ भी याद नहीं रहता है हां  केवल ध्याता, ध्येय और ध्यान रहता है और उस समय जो परिणाम घटित होता है वो कि गई ध्यान क्रिया का परिणाम होता है अर्थात हम जो जानना चाहते हैं उस प्रश्न का उत्तर होता है अर्थात परिणाम को ही भविष्य कहा जाएगा जो कि वर्तमान में कि गई ध्यान क्रिया के ऊपर आधारित होता है अर्थात जैसी क्रिया वैसा परिणाम आएगा आवश्यकता है आप को ध्यान सिखाने वाला अनुभवी हो जो ध्यान योग के विषय में सही से जानता मुझे इसका 30 वर्ष का अनुभव है जो मैं दूसरे को भी करा सकता हूं आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं।
।।।ॐ नमः शिवाय।।।

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