
जब हम ध्यान लगाना शुरू करते हैं और जब ध्यान लगने लग जाता है और जब ध्यान में देखी गई बातें सच होने लगती हैं तो ध्यान में हमें वास्तविक गुरू की प्राप्ति हो जाती है या हम कह सकते हैं गुरू तत्व मिल जाता है और फिर जब हम गुरू द्वारा प्रश्नों के उत्तर पाने लग जातें हैं तो हमारी ध्यान की यात्रा यहाँ से शुरू होती है अर्थात खोज शुरू हो जाती है ठीक वैसे ही जैसे हमारे ऋषियों ने खोज की थी और खोज करके जब ध्यान में प्राप्त ज्ञान को सत्य पाया तो उसे लिख दीया वो जिस विषय का ज्ञान है और इस प्रकार बहुत से ग्रंथो को हमारे ऋषियों ने लिखा या हम कह सकते हैं ग्रंथो की उत्पत्ति हुई आज भी हमें उसी ध्यान की आवश्यकता है जो प्रमाणित और सत्य हो तभी हम ध्यानके वास्तविक स्वरूप समझ पायेंगे। ।। जय श्री कृष्णा ।। ।।निजानंद स्वामी।।
