
ध्यान आज के समय में जगह जगह ध्यान योग सिखाया जा रहा है पर सच तो ये है कि सिखाने वाले को स्वंय ध्यान लगाना नहीं आता और किताबे पढ़कर सिखा रहा है ध्यान योग को केवल एक धन एकत्रित करने का साधन बना लिया है वास्तव में किसी से ध्यान का अर्थ पूछा जाए तो वो भी नही पता ये केवल अनुभव का मार्ग है एक अनुभव करने वाला ही दूसरे को अनुभव करा सकता है पर अनुभव कराने वाला मिलता नहीं मैनें ध्यान को गहराई से समझा है अनुभव किया है जिसे मैं दूसरे को भी अनुभव करा सकता हूं।
।।ॐ नमः शिवाय।।
