
हमें चाहिए ऐसा ज्ञान जो अपने आप को प्रमाणित करता हो अर्थात सत्य ज्ञान ऐसा ज्ञान जो हमें एक वास्तविक योग्यता प्रदान करे और ये हम सब का अनुभव भी है कि हमारे द्वारा प्राप्त ज्ञान को कोई भी हमसे छिन नही सकता क्योंकि वो हमारी स्मृति में रहता है और ऐसा ज्ञान शब्दों में छिपा रहता है अर्थात हमारे बहुत से प्रश्नों के उत्तर पर हम बिना ध्यान के उन्हें जान नहीं पाते ध्यान ही वो साधन है जिसके द्वारा हमने आरंभ में शब्द को जाना और फिर व्याकरण बनाई और शब्दों के प्रयोग के द्वारा अपनी बात दूसरों को समझाने में सफल हुए उसी ध्यान को हम वर्तमान समय में भूलते जा रहे हैं और ध्यान के सत्य ज्ञान से दूर होते जा रहे हैं वास्तव में शिक्षा की शुरुआत ध्यान से ही होती है और वर्तमान समय की शिक्षा पद्धति ऐसी है जिसमें ध्यान का कोई विषय ही नहीं है ऐसी शिक्षा जिसे हम पेपर में पास होने के लिए याद करें वो शिक्षा हमें अनुभव के ज्ञान तक नहीं पहुंचा सकती इसलिये शिक्षा पद्धति में ध्यान का विषय आवश्यक है जय ।।श्री कृष्णा।।
।।निजानंद स्वामी।।
