योगश्चित्त वृत्ति :- योग को समझने के लिए हमें मन में उठने वाली तरंगों ( वृतियों) को गहराई से समझना पड़ेगा मन में वृत्ति क्यों उठती है, वो कहां से आती है वो मेरी स्वयं की वृत्ति है या बाहर से वायुमंडल से आई है क्या किसी ने भेजी है या पहले से मेरी मेमोरी में सेव थी किसी वृत्ति को मन में सेव कैसे करते हैं और सेव होने पर वो क्या क्रिया करती है उसका परिणाम क्या आता है, वृत्ति को लक्ष्य पर एकाग्र करने से क्या क्रिया होती है और अपनी वृत्ति को दूसरे तक ध्यान एकाग्र करके कैसे पहुंचा सकते हैं, वृत्ति की धारणा करके एकाग्रता के द्वारा भूत, भविष्य वर्तमान को कैसे जान सकते हैं अर्थात वृतियों की क्रिया और परिणाम को कैसे जानें, भविष्य में होने वाली घटनाओं को वर्तमान में कैसे जानें, शब्द क्या है उसका प्रभाव क्या है और परिणाम क्या है जिस विषय का ज्ञान कहीं नहीं है किसी किताब में नहीं है अर्थात नया ज्ञान कैसे प्राप्त करें ये सब समझने के लिए हमें वृतियों को गहराई से समझना पड़ेगा उनका अध्ययन करना पड़ेगा। ।।। ॐ नमः शिवाय।।।